वैश्विक संकट - विश्व सरकार



कई बार एक समस्या दूसरी समस्याओं के समाधान को रोक देती है। यदि हम यूक्रेन संकट की केवल एक ही समस्या का समाधान कर सकें, तो वह कौन-सी होगी? 

विकट समस्या यह है कि सत्ता के मद में चूर नेता को युद्ध में जाने से कोई नहीं रोक नही पा रहा है। आज दुनिया में एक मजबूत, एकीकृत संस्था का अभाव है, जो न केवल यह घोषणा करे कि कोई युद्ध अवैध है, बल्कि दृढ़ता से हस्तक्षेप कर सैन्य आक्रमण के किसी भी प्रयास को रोके।

संयुक्त राष्ट्र संघ हमेशा और हर युद्ध की स्थिति में अपर्याप्त साबित हुआ है। इसकी शांति-रक्षक सेनाएँ वहाँ प्रवेश करती हैं जहाँ "शांति और स्थिरता बनाए रखने" के लिए किसी प्रकार के संघर्ष विराम पर पहले ही सहमति हो चुकी होती है। जिस तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बनाया गया है, उसके परिणामस्वरूप किसी भी रचनात्मक युद्ध-पूर्व पहल को हमेशा ही ठंडे बस्ते में डालना पड़ा है क्योंकि परिषद में कुछ शक्तियाँ वीटो के अपने स्थायी अधिकार का दुरुपयोग करती हैं।

सुरक्षा परिषद का एक स्याह पक्ष यह है कि इसके स्थायी सदस्य परमाणु शक्तियाँ हैं और उनमें से कई अपनी सुविधा और स्वार्थ के अनुसार युद्ध में लग जाते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से, अमेरिका ने कई युद्ध शुरू किए हैं; जिनमें से वियतनाम और इराक युद्ध जनता द्वारा कभी न भुलाए जाने वाले अपराधों में से हैं।  ब्रिटेन अमेरिका के साथ इराक में घुसा। रूस ने भी हाल के दशकों में कई युद्ध अपराध किए हैं। अपने ही लोगों के खिलाफ चीन के हालिया अपराध सर्वविदित हैं, और चीनी नेतृत्व का कहना है कि ताइवान को चीन के साथ "फिर से शामिल होना चाहिए और ऐसा होकर रहेगा"। इन देशों को संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय सुरक्षा समिति के स्थायी सदस्य के रूप में रहने का नैतिक अधिकार कहाँ है? यूक्रेन संकट के संबंध में इन महाशक्तियों ने जिस तरह से टिप्पणी की और कार्य किया, उसे केवल पाखंड ही कहा जा सकता है।

आज दुनिया को न केवल सैन्य बल, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक बल पर आधारित एक लोकतांत्रिक सरकार की जरूरत है 

आज दुनिया को न केवल सैन्य बल, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक बल पर आधारित एक लोकतांत्रिक सरकार की जरूरत है, जो सभी के हित के लिए काम करे, न कि निहित स्वार्थ और मुनाफाखोरी के लिए। एक ऐसी विश्व सरकार, जिसके निचले सदन में  सभी देश अपनी जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधियों को भेजने के हकदार हों। ऊपरी सदन में, प्रत्येक देश के दो प्रतिनिधि निचले सदन के प्रस्तावों को वीटो करने के अधिकार के साथ बैठ सकें, जो ऐसे प्रस्तावों को  पुनर्विचार के लिए निचले सदन में वापस भेज सकें।

विश्व सरकार को सबसे पहले महत्वपूर्ण बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित करना चाहिए, जैसे कि सभी  प्राणियों की सुरक्षा और विकास, और सभी मनुष्यों को आध्यात्मिक अभ्यास का अधिकार। एक विश्व मलिशा (सैनिक प्रशिक्षण प्राप्‍त गैर-पेशेवर लोगों की सेना) को इस सरकार की कमान में होना चाहिए ताकि आवश्यकतानुसार कहीं पर भी शांति मिशन को अंजाम दिया जा सके। विश्व सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन सभी देशों द्वारा किया जाना चाहिए। संक्षेप में, विश्व सरकार की शुरुआत के लिए प्रउत का यह प्रस्ताव है।

 

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