दुनिया के नैतिकवादियों एक हो !


समाज में एक ओर असामाजिक तत्वों की भीड़ देखने को मिलती है, तो दूसरी ओर नीतिवादियों में निराशा का भाव है। इसलिए इन नीतिवादियों में समाज से पलायन की प्रवृत्ति पैदा हो गई है। अधिक धन और शक्ति के साथ, असामाजिक तत्व मजबूत स्थिति में हैं; और नीतिवादी ही अपराधी प्रतीत होते हैं। यह स्थिति न तो वांछनीय है और न ही उचित, लेकिन आगे ऐसी स्थिति बनी नहीं रहनी चाहिए। 

आपका कर्तव्य है नीतिवादियों को एकजुट करना। समाज को नैतिकवादी और अनैतिकवादी दो खेमों में बँटने दो। उनके बीच खुली लड़ाई होने दो। नीतिवादी इतने लंबे समय तक बिखरे हुए थे, और इसलिए वे लड़ नहीं सके। पाँच नीतिवादियों की एकजुट ताकत सौ अनैतिकवादियों की एकजुट ताकत से कहीं अधिक है, क्योंकि अनैतिकवादियों के बीच एक अपवित्र गठबंधन है। 

आज बंद दरवाजों के भीतर बस ध्यान करने से नहीं चलेगा। नैतिकता और अध्यात्म के अभ्यास से शक्ति संग्रहित करो, और अपने आप को अनैतिकतावादियों के खिलाफ एकजुट करो।


- श्री प्रभात रंजन सरकार

148, सुप्रीम एक्सप्रेशन -2

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