पाप का घड़ा फूटेगा (कविता)

पाप का घड़ा फूटा है हर युग में
पाप का घड़ा फूटेगा इस युग में
धार्मिकों का तिरस्कार हुआ है कलियुग में
नैतिक बल जुटेगा अब इस युग में।
पाप का आधार है छल, बल, कौशल
पाखण्डी कर रहे आघात मचल - मचल
समय कुछ क्षण विधर्मियों का देता साथ
भीष्म भी दुर्योधन के हाथ रख देते हाथ
मगर धर्म वहीं जहां कृष्ण खड़े हैं
विजयश्री दिलाने निश्चयी अटल अड़े हैं
सूरज डूबा नहीं बादलों में छिपा है
बादलों का छंट जाना हर युग में लिखा है
अर्जुन! गांडीव तैयार रखो सूरज उठेगा
जयद्रथ वध होगा और पाप का घड़ा फूटेगा।

- रतन कुमार महतो ‘सत्यार्थी’



image courtesy: media.licdn.com

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