शराब पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर पीबीआई का धरना









कल 30 जनवरी 2019 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर, प्राउटिष्ट ब्लाक, इंडिया (पीबीआई), जो एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, और राष्ट्रीय शराबबंदी संयुक्त मोर्चा (राशसंमो), सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों ने शराब की बिक्री पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर एक दिन का सत्याग्रह किया । इस आयोजन में दिल्ली, हरियाणा, यूपी, महाराष्ट्र, उत्तराखंड आदि सहित देश के 11 राज्यों से आए कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने भाग लिया।



आंदोलनकारियों को सम्बोधित करते हुए , राशसंमो के संयोजक सुल्तान सिंह ने कहा कि सरकार के संरक्षण में शराब देश के हर गली और नुक्कड़ तक पहुँच गई है, और लोग न सिर्फ घातक बिमारियों के शिकार हो रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने धन, करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक सुख-शांति से भी हाथ धोना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं और बच्चे शराब से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे ही शराब से पैदा हुई घरेलू हिंसा और बलात्कार के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की सफलता के लिए आवश्यक है कि शराब पर एक साथ पूरे देश में प्रतिबन्ध लगाया जाए, और ऐसा न होने तक राशसंमो चैन से नहीं बैठेगा।

पीबीआई के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य संतोषानंद अवधूत ने कहा कि यह विडंबना ही है कि एक ओर हम खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र कहते हैं, तो वहीं दूसरी ओर हम शराब के गुलाम बन गए हैं; हम शराब के सख्त विरोधी महात्मा गांधी की तस्वीर देश की मुद्रा पर छापते हैं और फिर उसी मुद्रा से शराब खरीदते हैं। आज  कोई भी अवसर हो, चाहे वह शादी हो या जन्मदिन की पार्टी, शराब के बिना पूरी नहीं मानी जाती। उन्होंने कहा कि हालांकि शराब का सेवन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर इसका बुरा असर पड़ता है, लेकिन इसने युवाओं की जीवन शक्ति को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि शराब पर प्रतिबन्ध से होने वाला राजस्व का नुकसान उस खर्च से बहुत कम है जो सरकार द्वारा शराब की वजह से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं, अपराधों, दुर्घटनाओं, छेड़छाड़ और बलात्कार की समस्याओं से निपटने के लिए किया जाता है।    
राशसंमो की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं कवियत्री नेहा त्रिपाठी ने अपनी मधुर वाणी में अपनी कविता के माध्यम से शराब द्वारा परिवार और समाज को होने वाले नुकसान का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया।

पीबीआई (हरियाणा) के संयोजक बलजीत आदित्य खटाना ने जोरदार शब्दों में शराब के सम्बन्ध में सरकार  की नीतियों की भर्तस्ना की। उन्होंने कहा कि शायद सरकार मंशा यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग शराब पीकर अपना होश खोते जाएं और देश में लूट और भ्रष्टाचार अबाधरूप से चलता रहे।

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और इस मुद्दे पर पीबीआई को अपना समर्थन व्यक्त किया।

उपर्युक्त वक्ताओं के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफसर आनंद कुमार, महावीर त्यागी, पीबीआई के राष्ट्रीय महासचिव कान्हू चरण बेहुरा, पीबीआई के आंदोलन सचिव केदारनाथ साहू, पीबीआई के संगठन सचिव राजकिशोर प्रसाद, पीबीआई(दिल्ली) के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी, पीबीआई (दिल्ली) के महासचिव बैद्यनाथ साह आदि ने शराब पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग के समर्थन में अपने विचार व्यक्त किए।

धरने के पश्चात, एक प्रतिनिधि मंडल ने अपनी निन्मलिखित मांगों का ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा:
1. शराबबंदी का कानून संसद पूरे देश के लिए बनाए तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल सुनिश्चित करे की यह ईमानदारी से लागू हो।
2. शराब के उत्पादन पर सख्त पाबन्दी हो। इसका लाइसेंस केवल औषध निर्माताओं  को ही सख्त हिदायतों के साथ स्वीकृत किया जाए।
3. उत्तर प्रदेश के उन्नाव, अलीगंज (एटा), कानपुर, आज़मगढ़ समेत अनेकों जनपदों में जहरीली शराब की घटनाओं की सीबीआई द्वारा जांच कराई जाए और दोषियों को दंडित किया जाए।
4. उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका तथा महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र शराब के चलते अत्यंत गरीब और पिछड़े हो गए हैं। आर्थिक और सामाजिक कारणों से वहां किसान आये दिन आत्महत्याएं करते रहते हैं। इन मामलों में  सरकार का असंवेदनशील रवैया समाप्त हो।
5. लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी शराब के ठेके मार्च से मई तक बंद रखे जाएं।
6. इस मुद्दे को संविधान (नीति निर्देशक तत्त्व), महात्मा गाँधी जी तथा देश की महिलाओं का व्यापक समर्थन प्राप्त है।


7. आवश्यकता पड़ने पर इस हेतु संविधान में उपयुक्त संशोधन किया जाए।

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