अब विदर्भ इस उपेक्षा को नहीं सहेगा : मधुकर निस्ताने


चंद्रपुर : 26 फरवरी को डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर चौक पर प्राउटिष्ट ब्लाक, इंडिया  (विदर्भ) के संयोजक मधुकर निस्ताने के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीबीआई के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य  संतोषानंद अवधूत भी उपास्थित  थे।  आंदोलनकारियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के 2/3 खनिज पदार्थ और 3/4 वन्य क्षेत्र विदर्भ में होने के बावजूद, इस क्षेत्र का  पर्याप्त औद्योगिक विकाश नहीं हुआ है। यहाँ से कोयला एवं खनिजों को दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता है, जिससे यहाँ बिजली उत्पादन और अन्य उद्द्योगों के विकाश के अवसर ख़त्म हो गए  है।

विदर्भ के साथ इस भेदभाव का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अभी तक विदर्भ के जितने  भी नेता विधानसभा या संसद पहुंचे हैं, उन्होंने विदर्भ को धोखा दिया है। अलग विदर्भ राज्य बनाने के लिए प्रयास करने की बजाय उन्होंने अपनी कुर्सी को बचाने पर उन्होंने ज्यादा ध्यान दिया है, इसलिए विदर्भ की दुर्दशा के लिए वे भी बराबर के जिम्मेदार हैं। 

मधुकर निस्ताने ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य के गठन के समय से ही विदर्भ लगातार उपेक्षा का शिकार रहा है। राज्य के बजट का बहुत छोटा हिस्सा विदर्भ के हिस्से आता है, जो उसके विकाश के लिए अपर्याप्त है।  पिछले मात्र 15 वर्षों में विदर्भ के 11 जिलों में लगभग 45000 किसानों ने आत्महत्या की है। कृषि की हालत खराब है और उद्योगों का सर्वथा अभाव है। अब तक की सभी राज्य सरकारें विदर्भवासियों की आवश्यकताओं और आकाँक्षाओं के प्रति संवेदनहीन रहीं हैं। लेकिन अब विदर्भ इस उपेक्षा को नहीं सहेगा !


 प्राउटिष्ट ब्लाक, इंडिया  विदर्भ  राज्य  के लिए  कई सालो से  लगातार आंदोलन  करता आ रहा है।  पिछले वर्ष 3 अक्टूबर 2019 को नई दिल्ली के  जंतर-मंतर पर धरना  प्रदर्शन  के बाद  विदर्भ क्षेत्र के सभी  सांसदों को इस सम्बन्ध में ज्ञापन देकर पीबीआई ने अपने  आंदोलन और तेज किया है। 
धरने के पश्चात् आंदोलनकारियों ने अपनी निम्नलिखित मांगों का एक ज्ञापन चंद्रपुर लोकसभा से संसद बालूभाऊ धानोरकर को दिया :
1. पृथक विदर्भ राज्य के निर्माण के लिए संसद एक प्रस्ताव लाकर इसके लिए जोरदार मांग की जाए।
2. यवतमाल से टीपेश्वर रेल सेवा शुरू की जाए।
3. यवतमाल-किनवट राज्यमार्ग निर्माण की घोषणा की जाए।
4. घाटंजी  मे  उपविभागीय अधिकारी  (महसूल )  कार्यालय  स्थापित  किया जाए।
5. अतिक्रमणधारक किसानों को मालिकाना  हक दिया  जाए। 









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