मंगलमय स्वागतम्, वर्ष 2021



अंतरराष्ट्रीय पंचाग का प्रथम दिवस एक जनवरी को हम नूतन वर्ष का अपनी पूरी  आंतरिकता और भावप्रवणता से स्वागत करते हैं। वह खुशियों, प्रेम और उल्लास का वर्ष हो-यही हमारी मधुर भावना और शुभ-कामना होनी चाहिए। 

इसमें संदेह नहीं कि आज जीवन चतुर्दिक समस्याओं, उलझनों और तड़पनों से घिरा है। कहीं-कहीं खुशियाली का मरु-उद्यान दिखाई देता है, परंतु विशाल जनसंख्या और विश्व मानवता का सामान्य जीवन, उत्पीड़न और हताशा-निराशा से भरा हुआ है। जब हम समाज जीवन के अंतरतम में जाकर अवलोकन करेंगे तब इस सच्चाई से अवगत होने में हमें तनिक भी समय नहीं लगेगा।

शासन-प्रशासन जितनी भी कुशलता से वास्तविकता को छिपाने का प्रयास करे किन्तु जो सत्य है उसे मर्मस्पर्शी भाषणों और लच्छेदार मुहावरों से नहीं झुठलाया जा सकता है। आज अगर हम अखबारों के पृष्ठों को उलटें तो सौ में निन्यानबे समाचार नकारात्मक पक्ष के ही होते हैं। उन्हें पढ़ कर मन में गहरी वेदना और दुःखी मानवता के प्रति दुख और करुणा के आवेश से मन भर उठता है। यह व्यवस्था अविलंब मनुष्य को खुशहाल बनाने में परिवर्तित हो जाय, इस संवेदना से प्राण झंकृत हो उठते हैं। 

इन्हीं विपदाओं और विषम परिस्थितियों के मध्य श्री श्री आनंदमूर्तिजी की गरजती वाणी सुनाई देती है:

"लाखों-करोड़ों धिक्कार, लांछना, निंदा, ग्लानि, कटुक्तियों की उपेक्षा कर नूतन का प्रकाश एक-न-एक दिन हर मनुष्य के घर में अवश्य ही प्रवेश करेगा।”

इतना ही नहीं, वे कहते हैं: ”मनुष्य के दुःखों की रात्रि जैसी भी हो, तपस्या का सूर्यालोक उसके समस्त अंधकार को दूर हटा देगा ही। मनुष्य के जीवन में अरुणोदय होगा ही होगा।”

वे मार्गदर्शन करते हुए कहते हैं कि - "अमानिशा की अंधतमिस्रा के उपरांत अरुणोज्ज्वल प्रभात का आगमन अवश्यंभावी है। ठीक उसी प्रकार मैं जानता हूं कि आज के इस अवहेलित मानवता के कोटि-कोटि धिक्कार और लांछना के बाद एक गौरवोज्ज्वल अध्याय का अवतरण होगा ही। जो मनुष्य से प्रेम करते हैं और मनुष्य के, जीव मात्र के, कल्याण की कामना करते हैं, उनके लिए उचित है कि इस शुभ लग्न के शीघ्रातिशीघ्र आविर्भाव हेतु संपूर्णरूपेण आलस्य का परित्याग कर इसी मुहूर्त से कर्मतत्पर हो उठें।”

यह सर्वसमर्थ सद्गुरु की महावाणी है, इसे फलित होना ही है। हम अपनी भूमिका के बारे में गंभीरतापूर्वक सोचें और अत्युग्र ”कर्मतत्पर हो उठें।”


- आचार्य संतोषानंद अवधूत  

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