1.15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ डाला गया बट्टे खाते में

 


चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही यानी कि वित्त वर्ष 2020-21 के नौ महीनों में बैंकों ने 1.15 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन को बट्टे खाते (राइट ऑफ) में डाल दिया है। केंद्र सरकार ने पिछले सोमवार को लोकसभा में ये जानकारी दी
। 

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि आरबीआई के दिशानिर्देशों और बैंक बोर्डों द्वारा स्वीकृत नीति के अनुसार एनपीए (वसूल नहीं हो पाए ऋणों) या बैड लोन को बट्टे खाते में डालकर संबंधित बैंक के बैलेंस शीट से इसे हटा दिया जाता है 

उन्होंने कहा कि बैंक आरबीआई के दिशानिर्देशों और अपने बोर्डों द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार अपनी बैलेंस शीट को ठीक करने, कर लाभ प्राप्त करने और पूंजी को अनुकूल बनाने के लिए अपनी नियमित प्रक्रिया के रूप में एनपीए को बट्टे खाते में डालने का कार्य करते हैं 

वित्त राज्य मंत्री ने बताया, ‘आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने वित्त वर्ष 2018-19, वित्त वर्ष 2019-20 और वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान क्रमश: 236,265 करोड़ रुपये, 234,170 करोड़ रुपये और 115,038 करोड़ रुपये के ऋण को बट्टे खाते में डाला है

ठाकुर ने दावा किया कि चूंकि बट्टे खाते में डाले गए ऋणों के उधारकर्ताओं पर पुनर्भुगतान का दायित्व बना रहता है और बट्टे खाते में डाले गए ऋण खातों में उधारकर्ताओं से कर्ज की वसूली की प्रक्रिया चलती रही है, इसलिए लोन को बट्टे खाते में डाले जाने से उधारकर्ताओं को कोई लाभ नहीं होता है। 

हालांकि खुद अनुराग ठाकुर द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से ही पता चलता है कि जो लोन बट्टे खाते में डाले जा रहे हैं, उसकी तुलना में सरकार काफी कम वसूली कर पा रही है। 

मंत्री के जवाब के मुताबिक, पिछले दो सालों और मौजूदा वित्त वर्ष की तीन तिमाही के दौरान बट्टे खाते में डाले गए लोन में से 68,219 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। 

चूंकि इस दौरान कुल 585,473 करोड़ रुपये के लोन बट्टे खाते में खाते में डाले गए थे, इस तरह वसूली गई राशि इसकी तुलना में महज 11.65 फीसदी है। 

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार बैंकों का कुल एनपीए, जो 31 मार्च  2015 की स्थिति के अनुसार 323,464 करोड़ रुपये था, वो 31 मार्च 2018 तक बढ़कर 1,036,187 करोड़ रुपये हो गया। 

 



 

Post a Comment

1 Comments

  1. इसमे आम आदमी ही है या सभी पूंजीपति..? ये। भी क्लियर होना चाहिए

    ReplyDelete