भारत में जनसँख्या विस्फोट - क्या है सच्चाई ?


 पहले से कम बच्चों का जन्म 

2019-20 के नेशनल हेल्थ फेमिली सर्वे (एनएचएफएस) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सभी समुदायों की महिलाओं की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में पिछले कुछ सालों में कमी दर्ज की गई है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के पांचवें चरण की रिपोर्ट से यह बात पता चली है. टीएफआर का मतलब यह होता है कि कोई महिला अपने प्रजनन काल में कितने बच्चे पैदा कर रही है. माना जाता है कि यदि यह आँकड़ा 2.1 या इससे कम हो जाए तो देश की आबादी कुछ वक़्त बाद बढ़नी बंद हो जाएगी.  

जारी सर्वे के अनुसार 2015-16 में हुए चौथे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे और 2019-20 में हुए पाँचवे सर्वे के बीच में फर्टिलिटी रेट में काफी अंतर देखा गया है।

 मुस्लिम समुदाय  में तेजी से गिरा जन्म दर 

आँकड़े देखने पर यह भी पता चलता था कि जिस समुदाय के लोग पहले ज्यादा बच्चे पैदा किया करते थे उनकी फर्टिलिटी रेट में गिरावट भी ज्यादा तेजी से आई है। उदाहरण के लिए, मुस्लिम समुदाय में सबसे ज्यादा 9.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह 2.62 से घटकर 2.36 हो गई है। साथ ही, हिंदु और मुस्लिम समुदाय के बीच  फर्टिलिटी रेट का अंतर भी कम होता जा रहा है।

1992 से अब तक 40% की गिरावट

1992-93 में यह सर्वे पहली बार हुआ था। तब से अब तक टोटल फर्टिलिटी रेट में 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उस वक्त फर्टिलिटी रेट 3.40 हुआ करती थी जो कि अब कम होकर 2.0 रह गई है। यह रेट रिप्लेसमेंट लेवल से भी कम है। रिप्लेसमेंट लेवल वह औसत होता है जिसपर जनसंख्या स्थिर हो जाती है। 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे का डेटा बताता है कि मुस्लिमों के अलावा दूसरे बडे़ समुदायों में टोटल फर्टिलिटी रेट रिप्लेसमेंट लेवल से कम हो गया है। अब तक पांच बार एनएफएचएस का सर्वे हो चुका है। इतने सालों में मुस्लिम समुदाय का टीआरएफ 46.5 प्रतिशत और हिंदु समुदाय का 41.2 प्रतिशत कम हो चुका है। 

 माँ-पिता की शिक्षा और आर्थिक स्थिति से है जन्मदर का संबंध

फर्टिलिटी डेटा यह भी दिखाता है कि बच्चों की संख्या का सीधा संबंध माँ-पिता की शिक्षा और आर्थिक स्थिति से भी है। मुस्लिमों में 15 से 49 साल की महिलाओं में 31.49 प्रतिशत महिलाएँ  अशिक्षित हैं और केवल 44 प्रतिशत ऐसी हैं जिन्होने स्कूली शिक्षा पूरी की है। वहीं हिंदुओं में यह आँकड़ा 27.6 प्रतिशत और 53 प्रतिशत का है। 

यह भी बात ध्यान देने योग्य है कि एक ही समुदाय में कई बार अलग-अलग राज्यों में टोटल फर्टिलिटी रेट में अंतर आ जाता है। अगर उत्तर प्रदेश की बात करें, तो हिंदुओं का टोटल फर्टिलिटी रेट 2.29 प्रतिशत है। वहीं तमिलनाडु में इसी धर्म समूह का टीआरएफ 1.75 है। इसी तरह यूपी में मुस्लिमों का टीआरएफ 2.6 है तो तमिलनाडु में 1.93 है जो कि रिप्लेसमेंट रेट से कम है।

 

 इस सम्बन्घ में विस्तार से जानकारी के लिए आप नीचे दिए लिंक पर जा सकते हैं :

http://www.rchiips.org/nfhs/?msclkid=3285ade3d04111ec8c4ed01df6bb0f1f

 

चित्र : इंटरनेट से

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